Hello दोस्तों, आप Matlabi Rishte Shayari in Hindi पढ़ने के शौकीन हैं तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। यहाँ हमने आपके लिए मतलबी रिश्तों की सच्चाई, दर्द और टूटे भरोसे को बयां करने वाली Matlabi Rishte Shayari का शानदार कलेक्शन तैयार किया है, जिसे पढ़कर आप अपने दिल के जज़्बात आसानी से व्यक्त कर सकते हैं।
दोस्तों, आज के समय में कई रिश्ते सिर्फ मतलब के लिए बनते हैं और काम निकलते ही बदल जाते हैं। ऐसे रिश्ते दिल को गहरा दर्द देते हैं और इंसान को अंदर से तोड़ देते हैं। Matlabi Rishte Shayari इस कड़वी सच्चाई को बहुत गहराई से शब्दों में बयां करती है। अगर आप भी ऐसे अनुभवों को महसूस कर चुके हैं और अपने जज़्बातों को शायरी के जरिए व्यक्त करना चाहते हैं, तो एक बार हमारी इस पोस्ट को जरूर देखें, यहाँ आपको एक से बढ़कर एक कड़वी लेकिन सच्ची और दिल को छू जाने वाली Matlabi Rishte Shayari मिलने वाली है, जो आपके एहसासों को बखूबी बयां करेगी।
Contents
Matlabi Rishte Shayari in Hindi

जिसे आप अपनी जान समझते हो,
वो अक्सर अपना मतलब निकालकर चले जाते हैं।
मतलबी लोग वही होते हैं,
जो जरूरत पड़ने पर ही याद करते हैं।
मतलब के रिश्ते जलते दीये जैसे होते हैं,
कभी भी बुझ सकते हैं।

आज के रिश्तों में दिल कम,
और मतलब ज्यादा होता है।
रिश्ते निभाओ लेकिन सोच समझकर,
मतलब निकलते ही लोग बदल जाते हैं।
कभी किसी के लिए इतना मत झुको,
कि वो तुम्हें अपनी सीढ़ी बना ले।

रिश्तों में मतलब घुस जाए,
तो वो रिश्ता बोझ बन जाता है।
हमने रिश्तों में दिल लगाया,
लोगों ने उसमें भी मतलब खोज लिया।
किसी के मतलब के लिए मोहरा मत बनो,
खुद की पहचान बनाओ।
सच्चे रिश्तों की कद्र करो,
क्योंकि मतलबी लोग हर मोड़ पर मिल जाएंगे।
मतलबी रिश्ते शायरी

मतलब के रिश्ते कांटे जैसे होते हैं,
जितना भी संभालो चुभ ही जाते हैं।
दिल से निभाया हर रिश्ता हमने,
पर वो सब मतलब के तले दबा हुआ निकला।
रिश्ते में प्यार होना चाहिए,
मतलब नहीं।

कुछ लोग रिश्ते ऐसे निभाते हैं,
जैसे उधार चुकता कर रहे हों।
जिसे अपना समझा था वो भी धोखा दे गया,
मतलबी दुनिया में सिर्फ स्वार्थ ही रह गया।
कभी अपनी अहमियत मत भूलो,
मतलबी रिश्ते तुम्हें सिर्फ इस्तेमाल करते हैं।

मतलबी रिश्तों से दूर रहना ही बेहतर है,
क्योंकि दिल टूटने से बेहतर है अकेला रहना।
मतलबी रिश्ते अक्सर,
मीठे शब्दों में छुपे होते हैं।
रिश्तों की असली पहचान तब होती है,
जब आप बेवजह याद किए जाते हैं।
रिश्तों की यही कहानी है,
मतलब निकले तो याद आई है।
मतलबी रिश्ते शायरी 2 लाइन

मतलब के रिश्ते ऐसे होते हैं,
जिनमें भरोसा कभी टिक ही नहीं पाता।
कभी किसी को दिल से चाह कर देखो,
वो मतलबी निकले तो दर्द समझ आ जाएगा।
हर मुस्कान के पीछे एक मतलब छुपा होता है,
आजकल के रिश्तों में।

कभी कभी रिश्ते भी बिजनेस बन जाते हैं,
जहां मुनाफा हो वही रिश्ता टिकता है।
रिश्ते निभाना कला है,
और मतलब निकालना चालाकी।
रिश्तों को निभाना है तो दिल से निभाओ,
वरना मतलबी बनकर सबको ठगना आसान है।

मतलबी लोग दोस्ती भी करते हैं,
सिर्फ अपने फायदे के लिए।
कितनी अजीब है ये दुनिया,
यहां मतलब के बिना कोई रिश्ता टिकता नहीं।
रिश्ते मतलबी हो जाएं तो दर्द बढ़ता है,
जब दिल टूटा हो, तब शायरी का ज़हन रहता है।
रिश्ते तो दिल के होते हैं,
मतलबी लोग तो बस ड्रामे करते हैं।
दिखावे के रिश्ते शायरी

मतलबी रिश्ते वो कांच हैं,
जो टूटते ही चुभ जाते हैं।
कभी सोचो उन रिश्तों के बारे में,
जिनका मतलब सिर्फ स्वार्थ होता है।
रिश्ते वही अच्छे होते हैं,
जो दिल से निभाए जाएं, मतलब से नहीं।
किसी के साथ इतना भी मत जुड़ो,
कि वो तुम्हें जरूरत समझने लगे।
रिश्तों की अहमियत समझो,
मतलबी बनकर रिश्ता मत निभाओ।
मतलब के रिश्तों में सच्चाई ढूंढना,
समंदर में मोती ढूंढने जैसा है।
अजनबी बनना आसान होता है,
जब मतलब निकल जाए तो।
वो जो कभी दोस्त थे, अब बस नाम के रह गए,
दिल में उनकी जगह, सिर्फ मतलब के रह गए।
आजकल रिश्ते भी मोबाइल नेटवर्क जैसे हो गए हैं,
जरूरत पड़ने पर ही कनेक्ट होते हैं।
हमने तो रिश्तों में सच्चाई रखी,
पर लोगों ने मतलब का ताज पहन लिया।
चालाक झूठे मतलबी रिश्ते शायरी
वो भी क्या लोग होते हैं,
जो मतलब के लिए रिश्ता निभाते हैं।
किसी का दिल मत दुखाओ,
क्योंकि मतलबी लोग तो बहुत हैं इस दुनिया में।
मतलबी लोग सामने तारीफ और,
पीठ पीछे बुराई करते है।
मतलब निकलते ही जो लोग बदल जाते हैं,
वो कभी आपके अपने थे ही नहीं।
रिश्तों पर रुपयों की किश्ते जोड़ देते है,
खाली हो जेब तो अपने हर रिश्तें तोड़ देते है।
हर रिश्ता भरोसे पर टिका होता है,
लेकिन मतलबी लोग इसे खिलौना समझ बैठते हैं।
बेवजह नहीं पड़ती है, रिश्तो में दरार,
कोई अपना ही ज़हर घोलता है, अपनों में।
जिन्हें हमने दिल से अपना माना,
वो भी अपने मतलब से ही हमसे मिले।
रिश्तों की इस भीड़ में मैं अकेला रह गया,
जो अपना था वही पराया बन गया।
आजकल के ज़माने में, अपने दिखते नहीं,
और जो दिखते हैं वह अपने नहीं।
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